तरक्की को चाहिए नया नजरिया
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की जंग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत की संविधान पीठ ने व्यवस्था दी कि उपराज्यपाल को स्वतंत्र फैसले लेने का कोई अधिकार नहीं है। वह पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि मामलों को छोड़कर अन्य मुद्दों पर निर्वाचित सरकार की सलाह से काम करने को बाध्य हैं।
शीर्ष अदालत के फैसले पर केंद्र ने कहा कि संविधान पीठ ने केवल दिल्ली के विशेष दर्जे को रेखांकित किया है जिसमें पारंपारिक रूप से राज्य होने की बात नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फैसले से साफ हो गया है कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं बन सकती जो केंद्र द्वारा लागू किए जा रहे कानूनों का उल्लंघन हो।
संविधान पीठ ने उन याचिकाकर्ताओं पर अपनी राय दी जिन्हें छोटी पीठ ने उसके पास भेजा था। पीठ ने कहा कि अब दिल्ली हाईकोर्ट के 4 अगस्त, 2016 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर उचित पीठ सुनवाई करेगी। इन मुद्दों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का गठन, प्रतिनियुक्ति और जांच आयोग का गठन आदि शामिल हैं।
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि एमएसपी बढ़ाने से सरकार पर लगभग 15000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
नई दिल्ली | एजेंसियां
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया मंचों से दो टूक कहा कि उन्हें इसके दुरुपयोग को रोकना ही होगा। उन्होंने कहा, किसी भी कंपनी जिसके जरिये फेक न्यूज़ फैलाई जा रही है उसे कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने व्हाट्सएप की ओर से भेजे गए जवाब को संज्ञान में लिया है और कदम उठा रही है।